वं. राष्ट्रसंतांचे साहित्य शोधण्यासाठी इथे शब्द सादर करा

अमर नही रहनेकी काया

(तर्ज : तुमबिन मोरी कौन खबर ले...)

अमर नही रहनेकी काया,
नाहक क्यों भरमावे ? टेक

देकर दुसरोंको दुख भारी, कौडी चोर उठावे ।
जब आवे जमराजका डंडा, छोड सभी चल जावे 

मेरा घर अरु कुटुमकबीला यह अभिमानसे गावे ।
जब होवे सिर काल खडा तो, कुछ नहि साथ लिजाबे 

धन तो जाय मगर यह तनभी, छोडके पर घर जावे ।
तुकड्यादास कहे सुन रे नर ! क्यों नहि यह लख पावे ?