- अध्याय पहिला : देवदर्शन
- अध्याय दुसरा : धर्माध्ययन
- अध्याय तिसरा : आश्रमधर्म
- अध्याय चौथा : संसार-परमार्थ
- अध्याय पाचवा : वर्ण-व्यवस्था
- अध्याय सहावा : संसर्ग-प्रभाव
- अध्याय सातवा : आचार-प्राबल्य
- अध्याय आठवा : प्रचार-महिमा
- अध्याय नववा : सेवासामर्थ्य
- अध्याय दहावा : संघटन-शक्ती
- अध्याय अकरावा : ग्रामरक्षण
- अध्याय बारावा : ग्रामशुद्धी
- अध्याय तेरावा : ग्रामनिर्माण कला
- अध्याय चौदावा : ग्राम-आरोग्य
- अध्याय पंधरावा : गोवंश-सुधार
- अध्याय सोळावा : वेष-वैभव
- अध्याय सतरावा : गरीबी-श्रीमंती
- अध्याय अठरावा : श्रम-संपत्ती
- अध्याय एकोणिसावा : जीवनशिक्षण
- अध्याय विसावा : महिलोन्नती
- अध्याय एकविसावा : वैवाहिक जीवन
- अध्याय बाविसावा : अंत्यसंस्कार
- अध्याय तेविसावा : सणोत्सव
- अध्याय चोविसावा : यात्रा-मेळे
- अध्याय पंचविसावा : देव-देवळे
- अध्याय सव्वीसावा : मूर्ति-उपासना
- अध्याय सत्ताविसावा : सामुदायिक प्रार्थना
- अध्याय अठ्ठाविसावा : प्रार्थना व विश्वधर्म
- अध्याय एकोणतिसावा : दलित-सेवा
- अध्याय तिसावा : भजन-प्रभाव
- अध्याय एकतिसावा : संत चमत्कार
- अध्याय बत्तिसावा : संतस्वरूप
- अध्याय तेहतिसावा : अवतारकार्य
- अध्याय चौतीसावा : प्रारब्धवाद
- अध्याय पस्तीसावा : प्रयत्नवाद
- अध्याय छत्तीसवा : जीवन-कला
- अध्याय सदतीसावा : आत्मानुभव
- अध्याय अडतीसावा : ग्राम-कुटूंब
- अध्याय एकोणचाळीसावा : भू-वैकुंठ
- अध्याय चाळीसावा : ग्रंथाध्ययन
- अध्याय एक्केचाळीसावा : ग्रंथ-महिमा