(तर्ज : मैं तो तेरा दास प्रभू !...)
अब यही करता हूँ, तुम-हममें बुराई होगी ।
जैसे कि कंसने तुमसे, प्रभु ! मुक्ति कराई होगी ॥टेक॥
कहता हूँ लोगकोभी यह, ईश लोभसे न मिलता है ।
मरनेको खडे हो जाओ, दर्श पुराई होगी ॥१॥
ऐसे ने मिले पाते हों तो यह पापि समझकर आना ।
तब दर्श पायगा हमको, जमघरकी हराई होगी ॥२॥
जैसी की पूतना मारी, वह दूध पिया कर करके ।
तुकड्याभी मारना वैसा, आनंद राई होगी ॥३॥