अजमा रहा खुशीसे, विषयोंका भान प्यारे ! ।
अजमायगा तुझे फिर, विषयोंका भान प्यारे ! ॥टेक॥
चटका लिया संगोंमे, अब वह न दूर जावे ।
कुछ भी करो दवाई, वह रोग जान प्यारे ! ॥१॥
तुझपे सवार होके, गट में फँसायगा वह ।
फिरके कहाँ भगेगा? अब तोभि मान प्यारे ! ॥२॥
पल -पलमें याद उसकी, नजरोंमे तेरी आवे ।
पछतायगा अखेरी, मेरे सुजान प्यारे ! ॥३॥
तुकड्या कहे सुधारो, हर वक्त नाम लेकर ।
प्रभुके भजनमें लाओ, तर जाय जान प्यारे ! ॥४॥