चल चल भाई, करे सफाई, कुडा कचरा साफ करे ।
बहुत दिनोंका रुका हुवा है, मिलकर सुंदर आज करे ॥धृ.॥
सडी हुई यह फल और सब्जी, कौन दिया है डाल यहां ।
मल मुत्रोंको बाहर छोडा, कौन किया बेहाल यहां ॥
समझ नहि आई है उनको, अपने घर का काज करे ॥१॥
पत्थर पानी पडा है बाहर, चलते ठोकर लगती है ।
घर देखे मैला-गंदा, मंगलता सब भगती है ॥
जिधर उधर सामान पडा है, जैसे पागल राज करे ॥२॥
घर नटीयोंके चित्र लगे है, साधू संत का नाम नहीं ।
नही देवता उनके घर मे, जानो उनका काम नहीं ।
सत्य-बचन, सद्ग्रंथ नहीं है, नहिं फुलवारी साज करे ॥३॥
आठ बजे सो करके उठते, पहिले पीते चाय-बीडी ।
बादमें झाड़े जाते, आकर मूँह धोते हैं अडी-नडी ।
तुकड्यादास कहे, उनके घर, आज चलो अंदाज करे ॥४॥